बस्तरिया शरबत के शौकीन थे दिलीप कुमार



ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार बस्तर के भेंडा भाजी का शरबत बडे चाव से पिया करते थे। ज्ञात हो कि रुपहले पर्दे पर एक नया इतिहास गढ़ने वाले  इस अभिनेता का कल 98 वर्ष की आयु मे मुंबई के  हिंदुजा अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन निधन हो गया है। 


 अभिनेता तो कई हुए किंतु दिलीप कुमार जैसा कोई दूसरा नहीं!अपने जीवन काल में ऐसे किरदार निभाए जो आज भी दर्शकों के जेहन पर छाए हुए हैं। लेकिन बस्तर का भेंडा शरबत उन तक कैसे पहुँचा ? यह प्रश्न कुतूहल वश सहज ही पूछा जा सकता है।काफी पुराना वाक्य है।प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने मंत्रिमंडल में बस्तर के युवा आदिवासी नेता अरविंद नेताम को शामिल किया था। वे शिक्षा राज्यमंत्री बनाए गए थे। उस जमाने में खेल मंत्रालय शिक्षा मंत्रालय के अधीन  होता था। फलस्वरूप कार्य विभाजन में श्री नेताम को सबसे कम उम्र के जूनियर मंत्री होने के नाते खेल मंत्रालय का प्रभार मिला। यहीं से भेंडा भाजी की कहानी भी शुरू होती है।सन् 1973 में श्री नेताम को दौरे पर कीनिया जाना था। 

उस जमाने में मुंबई से कीनिया की सीधी उड़ान हुआ करती थी। इसलिए  राज्य मंत्री अरविंद नेताम ने मुंबई से कीनिया के लिए शाम की उड़ान से अपनी टिकट बुक कराई थी। उसी हवाई जहाज से अभिनेता दिलीप कुमार भी यात्रा करने वाले थे । उन्हे उस वक्त सुखद आश्चर्य हुआ जब अपने बगल की सीट  पर अभिनेता दिलीप कुमार बैठे पाया।  कीनिया के लिए हवाई जहाज जैसे ही रनवे से उड़ा तनिक सा कुछ आते हुए श्री नेताम ने  अपना परिचय अभिनेता दिलीप कुमार को दिया । अभिनेता दिलीप कुमार भी एक युवा आदिवासी नेता और मंत्री से मिलकर  बड़े खुश हुए। मुंबई से कीनिया तक के लगभग डेढ़ घंटे के सफर में अभिनेता दिलीप कुमार श्री नेताम के साथ फुटबॉल, क्रिकेट तथा बस्तर के आदिवासियों पर चर्चा करते रहे। और इस हवाई सफर ने एक राजनेता की प्रगाढ़ता अभिनेता के साथ करा दी। श्री नेताम  पहली ही मुलाकात में अभिनेता दिलीप कुमार से काफी प्रभावित हो गए थे। इसलिए उन्होंने दूसरे माह उनसे मुलाकात की योजना बनाई ।एक माह बाद जब वे मुंबई उनसे मिलने पहुंचे तो वे शूटिंग में व्यस्त थे। 

इसके बावजूद उनसे मुलाकात हुई।इसके बाद संयोगवश 1975 में भारत और वेस्टइंडीज के बीच क्रिकेट टेस्ट मैच का आयोजन मुंबई में मुकर्रर हुआ। इस दरमियान श्री नेताम पांच दिनों तक मुंबई ठहरे। और फिर  दिलीप कुमार से मुलाकातों का सिलसिला प्रारंभ हो गया। बस्तर के आदिवासी नेता श्री नेताम को उस वक्त बड़ा सुखद आश्चर्य हुआ जब पहली दफा उन्हें दिलीप कुमार ने अपने बंगले पर लंच पर आमंत्रित किया।  उन्होंने श्री नेताम से एक ही थाली में भोजन करने का भी आग्रह किया। श्री नेताम इस आग्रह को टाल नहीं पाए। इस प्रकार लजीज बिरयानी का लुफ्त उन्होंने  दिलीप कुमार के साथ एक ही थाली में उठाया।   अपनी पुरानी स्मृतियों में झांकते हुए  जब दिलीप कुमार के बारे में श्री नेताम बातें करते हैं तो उनके आंखों में अजीब सी चमक आ जाती है। वेस्टइंडीज के टेस्ट क्रिकेट मैच के दरमियान  अभिनेता दिलीप कुमार ने श्री नेताम को बेवर स्टेडियम में आमंत्रित कर उनका परिचय अभिनेता राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, तथाअमिताभ बच्चन सहित 25 -30 अन्य अभिनेताओं से भी कराया था ।  मुंबई के पाली हिल स्थित अपने बंगले पर भी उन्हें डिनर के लिए वे बुलाया करते थे जहां  देर रात तक महफिल जमा करती थी । श्री नेताम गर्व के साथ बताते हैं कि अभिनेता दिलीप कुमार को शराब और सिगरेट से सख्त परहेज था किंतु वे बस्तर की  भेंडा भाजी और उसके शरबत के कायल थे। 

बस्तर में भेंडा भाजी को खट्टा भाजी के नाम से भी जाना जाता है। इसके लाल रंग के फल को सुखा कर और फिर पाउडर बनाकर उसका शरबत बनाया जाता है जिसका उपयोग गर्मियों में किया जाता है। यह शरीर के लिए काफी स्वास्थ्यवर्धक होता है । अपने दिल्ली प्रवास के दरमियान अभिनेता दिलीप कुमार बस्तर के इस शरबत को पीने के लिए अकसर श्री नेताम के  बंगले  पर आ धमकते थे।   दिलीप कुमार वास्तव में ट्रेजडी किंग थे। 

निजी जीवन में भी उनका अंदाज दार्शनिकों जैसा होता था । अक्सर वे दार्शनिकों के अंदाज में दुनिया जहान की बातें  भी किया करते थे। नेता और अभिनेता की यह मित्रता  धीरे-धीरे परवाने चढ़ती गई जिसके फलस्वरूप सांसदों एवं अभिनेताओं के मध्य गाजियाबाद में एक क्रिकेट मैच का आयोजन भी किया गया। इस मैच के सूत्रधार श्री नेताम थे और गाजियाबाद के उद्योगपति कपिल मोहन।  मोहन मिकिंज औद्योगिक परिसर के मैदान में सितारों की महफिल जमी और क्रिकेट मैच खेला भी गया। 

श्री नेताम बताते हैं कि दिलीप कुमार अपनी धर्मपत्नी सायरा बानो से हुए परिचय कराना नहीं भूलते थे किंतु सायरा बानो ज्यादा बातचीत में दिलचस्पी नहीं लेती थी। ठीक इसके विपरीत दिलीप कुमार घंटों देश दुनिया के हाल और हालातों पर चर्चा किया करते थे। दिलीप कुमार रुपहले पर्दे के एक ऐसे अभिनेता थे जो वास्तविक जीवन में भी सराहा जाते थे।  यही कारण है कि फिल्मी दुनिया के की जानी-मानी हस्तियां उनके पैर तक छुआ करती थी। कभी-कभी मित्रों की मंडली में बातचीत करते करते दिलीप कुमार बेहद भावुक हो जाया करते थे।  

इस भावुकता में   पारिवारिक जीवन और संघर्षों की गाथा बताते- बताते उनकी आंखें भर आती थी। पेशावर और देवलाली की बातें अक्सर वे किया करते थे। देवलाली नासिक के पास स्थित एक कस्बा है जहां उनके पिताजी सेना में फलों की आपूर्ति  का कारोबार कर अपना जीवन यापन किया करते थे। इस महान अभिनेता को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।