बेकाबू करोना, जनता परेशान



करोना महामारी की दूसरी लहर ने छत्तीसगढ़ सहित पूरे बस्तर संभाग में अब कहर बरपाना शुरू कर दिया है। अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं। लगातार हो रही मौतों के कारण अफवाहों का बाजार गर्म है। टीकाकरण के बावजूद आम जनता दहशत में है। 


 देश के जाने-माने चिकित्सक डॉक्टर शिव कुमार सरीन (निदेशक, आईएलबीएस, लखनऊ) का कहना है कि वर्तमान में जो नए शोध आए हैं उनसे यह ज्ञात होता है कि हमारे पास जो परीक्षण की किट उपलब्ध है उसमें वायरस के दो से अधिक जीन पकड़ में नहीं आते है। ठीक इसके विपरीत विदेशों में एक ऐसा किट तैयार किया जा चुका है जिसमें वायरस के चारों जीन पकड़ में आ जाते हैं।  डॉक्टर सरीन का यह भी कहना है कि कोरोना के दूसरी लहर से पीड़ित 80% मरीजों में वायरस सीधे फेफड़े और आंतो पर हमला करता है ।इसके लक्षण भी अब बदल गए हैं। दस्त, बदन में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी- बुखार, सर्दी जुकाम, जोड़ों का दर्द, खांसी, कमजोरी व भूख नहीं लगने के कारण भी आप कोरोना के मरीज हो सकते हैं। दरअसल कोरोना के हमले के बाद आमतौर पर मरीज के गले के पीछे वायरस मल्टीप्लाई होता जाता है जिसके कारण न तो उसे भोजन में स्वाद मिलता है और न ही सुगंध।  यदि आप फैटी लीवर वाले व्यक्ति हैं तो करोना के दूसरे लहर में आपको विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ज्ञात हो कि भारतवर्ष में एक तिहाई आबादी फैटी लीवर से पीड़ित है। चिकित्सा वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि  सर्वाधिक चिंता की बात यह है की दूसरी लहर का यह वायरस आरटीपीसीआर के टेस्ट में पकड़ से बाहर रहता है। पहले टेस्ट में रिजल्ट नेगेटिव आता है।  कुछ दिनों बाद पुनः जांच कराने पर रिजल्ट पॉजिटिव आ जाता है। विशेष रुप से बच्चों, टीनएजर युवाओं को दूसरी लहर का कोरोना वायरस आसानी से अपना ग्रास बना रहा है। यही कारण है कि पिछले 24 घंटे में देश में 234000 से ज्यादा कोरोना के केस सामने आए हैं। लखनऊ के ही एक अन्य चिकित्सक डॉ वेद प्रकाश के अनुसार वर्तमान में जो टीके कोरोना से बचने के लिए देश में लगाए जा रहे हैं, वे उस प्रकार कारगर नहीं है जिस प्रकार हैपेटाइटिस बी के टीके कारगर होते हैं। इसकी वजह यह है कि इस वायरस का विहेब  म्युटेंट हो रहा है। फलस्वरूप वैक्सीनेशन के बावजूद व्यक्ति को उतनी हार्ड इम्यूनिटी नहीं मिल पा रही है। यही कारण है कि इंग्लैंड में अगले सितंबर माह से बूस्टर टीका लगाने की योजना बनाई गई है। दरअसल जब से यह शोध प्रकाश में आया है कि कोरोना की दूसरी लहर का वायरस ड्रॉपलेट की बजाए हवा में 6 मीटर तक  आसानी से फैल रहा है तब से चिकित्सा वैज्ञानिक सकते में हैं। वैसे दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भारत में चल रहा है । यह बात दीगर है कि  टीके लगने के बावजूद कोरोना वायरस  के दूसरे लहर को नियंत्रण करने में कठिनाई  कठिनाई हो रही है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि करोना की वर्तमान स्थिति सबसे ज्यादा व्यक्ति के विवेक पर प्रतिकूल असर डाल रही है। मनोवैज्ञानिक असर होने के कारण आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं। अकेलापन इसकी मुख्य वजह है। यही कारण है कि इंग्लैंड में अकेलेपन से निपटने के लिए एक पृथक से मंत्रालय तक गठित किया जा चुका है।  चिकित्साकों ने आम जनता से अपील की है कि वे करोना के दूसरी लहर में ज्यादा सावधान रहें। इसे हल्के में ना लें। संक्रमण होने की दशा में तत्काल नजदीक के अस्पताल से संपर्क करें। हाथों को साफ पानी और साबुन से धोते रहें। मास्क लगाएं। छींक  और खांसी आने पर चेहरे को ढकें। व्यक्तिगत स्वच्छता  पर विशेष रूप से ध्यान दें।  हाथों को सही तरीके से साफ करें। दैनिक उपयोग में आने वाली चीजों को साफ सुथरा रखें। गर्म पानी  बार-बार पीने में उपयोग करें।   एंटीबायोटिक दवाओं का ज्यादा सेवन न करें। इसके ज्यादा सेवन से शरीर के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचता है। अनुमान है कि अप्रैल माह के बाद इस दूसरी कोरोना वायरस की लहर कमजोर पड सकती है।


राजेंद्र कुमार तिवारी

( अध्यक्ष )

आंचलिक समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, जगदलपुर ।