पार्टी संगठन में चुनाव द्वारा नियुक्तियां चाहते हैं राहुल


 नई दिल्ली। देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल कांग्रेस पार्टी में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। पार्टी की कार्यसमिति की बैठक भले ही संपन्न हो गई हो किंतु अभी भी पार्टी दो धडों में साफ़ विभाजित नजर आ रही है। पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाने की मांग को लेकर कार्यसमिति की बैठक के पहले लीक हुए पत्र के मामले से शीर्ष नेतृत्व की किरकिरी हुई है । इसलिए पार्टी के बड़े नेता राहुल गांधी चाहते हैं कि पत्र लिखने वाले नेताओं के जनाधार की भी पोल खुले। इस हेतु उन्होंने बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति चुनाव द्वारा कराने का सुझाव दिया है। 

ज्ञात हो कि पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी इन दिनों अस्वस्थ चल रही हैं ।इसके बावजूद पार्टी के 23 नेताओं द्वारा पूर्णकालिक अध्यक्ष को मुद्दा बनाकर पत्र लिखने के मसले को बगावत की श्रेणी से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सीडब्ल्यूसी की अगली बैठक में चुनाव कराने के लिए एक केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण की नियुक्ति की संभावना है। पत्र लिखने के बाद कांग्रेस में दो खेमों के बीच लग रहा है तलवार खींच गई हैं। भले ही पार्टी ने कार्यसमिति की बैठक में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर सोनिया गाँधी के नेतृत्व में विश्वास जताया है लेकिन अभी भी पार्टी के असंतुष्ट नेतृत्व को लेकर संतुष्ट नहीं हुए है। गैर- गांधी परिवार के नेतृत्व को लेकर जो नेता मुहिम चला रहे हैं, उनकी जमीनी पकड़ की पोल खोलने की योजना भी बनाई जा रही है। 

 सूत्रों के अनुसार संगठन में चुनाव उन नेताओं के जनाधार को उजागर करेगा जिन्होंने गांधी परिवार को चुनौती देने की कोशिश की है। राहुल खेमे का मानना है राहुल गांधी ने 2019 की हार की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला लेकर एक मिसाल कायम की, लेकिन पार्टी में वे जो हार के लिए समान रूप से जिम्मेदार थे, वे जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं थे। 

अगर संगठन में चुनाव हुए तो कांग्रेस के इस गुट का जनाधार उजागर हो जाएगा कि उनका अपने ही राज्यों में कोई समर्थन नहीं है। अभी असंतुष्टों की मुख्य शिकायत यह है कि भले ही सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं, फिर भी निर्णय राहुल गांधी द्वारा लिए जाते हैं और संगठनात्मक या राजनीतिक विषय पर चर्चा करने के लिए राहुल से मिलना मुश्किल है। शीर्ष नेताओं की शिकायत यह भी है कि राहुल गांधी से मिलने के लिए केसी वेणुगोपाल या रणदीप सिंह सुरजेवाला के माध्यम से जाना पड़ता है जो बहुत जूनियर हैं, इसलिए वरिष्ठ नेताओं को यह व्यवस्था स्वीकार नहीं है।